मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलने के पीछे की कह

first image

बहुत हलचल हो रही है कि सरकार मुग़ल सराय जंक्शन रेलवे स्टेशन का नाम बदलना चाहती है तो सोचा मैं और आप भी जान लें कि असल में ऐसा क्योँ हो रहा है फिर यह सियासी मुद्दा है। कहा जाता है कि मुगलसराय पहले काशी क्षेत्र में आता था। 3 ईसा पूर्व लगभग 2300 साल पहले सम्राट अशोक ने जब सड़कें बनवायी थीं तो तब यहां (मुगलसराय) से बिहार के लिए सड़कें बनवायी गई थीं। तो कुछ समय पश्चात यहाँ शेरशाह सूरी ने GT रोड बनवाया था। कहा जाता है कि शेरशाह ने लाहौर से कलकत्ता तक सन 1700 में सरायों का निर्माण कराया था, जहां पर सैनिक आराम करते थे। सन 1555 के आसपास हुमायूं के काल में मुगल यहां आए थे तो तब यहां अलीनगर और गल्लामंडी में दो सराय हुआ करते थे। कहा जाता है कि इस इलाके का नाम इसी वजह से मुगलसराय पड़ा था। हुमायू के शासनकाल के दौरान शेरशाह सूरी ने यहां पर दो सराएँ बनवायी थीं, जहां पर सेना का ठहराव होता था ज्यादातर। बहुत बड़ा कारण ये माना जाता इसी के नाम पर इस जगह का नाम मुगलसरया पड़ा। मुग़लसराय उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले का एक शहर है जो वाराणासी से जुड़ा हुआ है। यहां भारतीय रेलवे का वर्ग A का बहुत बड़ा रेलवे स्टेशन है। यह भारतीय रेलवे का महत्वपूण केन्द्र और एशिया का सबसे बडा रेलवे यार्ड कहलाया जाता है। लगभग पूरे पूर्वांचल में मुगलसराय को पेट्रोलियम की सप्लाई का केंद्र माना जाता है। माना जाता हैं चन्धासी कोयले की सबसे खास मंडी है और यह भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जन्म भूमि भी है। रेल लाइन का विस्तार- लॉर्ड एल्गिन के समय में 1862 में मुगलसराय से दानापुर तक रेल लाइन बिछाया गया था। जिसके बाद मुगलसराय से मिर्जापुर के बीच 1 जनवरी 1864 को इस जगह पर रेलवे लाइन चालू किया गया था। 1880 में ब्रिटिशों द्वारा यहाँ पर भवन का निर्माण किया गया था। कमलापति त्रिपाठी ने 1976 में एक करोड़ 11 लाख की लागत से यहाँ स्टेशन और बिल्डिंग को पास किया था।कहा जाता है कि सन 1982 तक यहाँ पर काम चला रहा और पूरा होने पर जनता को समर्पित किया गया था। इसके बाद यह यहाँ पर मध्य रेलवे का मुख्यालय बना गया था। मुगलसराय स्टेशन एशिया की सबसे बड़ा यार्ड माना जाता है। 1. मुगलसराय एशिया की सबसे बड़ी यार्ड कही जाती है। जिसकी लम्बाई 12. 6 किमी है। 250 किमी से ज्यादा लम्बी लाइनों का जाल मुगलसराय बिछाया गया है। मुगलसराय में कंट्रोल के लिए 10 ब्लॉक केबिन और 11 यार्ड केबिन का भी निर्माण किया गया है। 2. मुगलसराय में 1984 इलेक्ट्रिक लोको शेड में 137 रेल इंजनों को रखे जाने का इंतजाम किया गया। 3. मुगलसराय प्लेटफार्म से पूरे भारत के लिए ट्रेनें गुजरती हैं 24 घंटा। 4. मुगलसराय में 4 लाइनें बहुत ही महत्वपूर्ण हैं जो कि मुगलसराय से पटना, मुगलसराय गया से हावड़ा और उड़ीसा तक, बनारस-लखनऊ-जम्मू तक, मिर्जापुर-दिल्ली-मुंबई-त्रिवेंद्रम तक जाती हैं। 5. पुरे भारत के लिए मुगलसराय से रोज़ाना 265 ट्रेनें आगमन और प्रस्थान करती हैं। 6. मान्यता हैं कि मुगलसराय और वाराणसी के बीच गंगा नदी पर यात्रियों के लिए डफरिन पुल सन 1882 में बनना शुरू हुआ था जो कि सन 1887 में बनाकर पूरा तैयार किया गया था। 7. मुगलसराय में रेलवे लाइन को बिछाने का काम सन 1942 से सन 1947 तक चला था और वही वक़्त था जब जनता के लिए ट्रेनों का आना-जाना शुरू किया गया था। सरकार का मुग़ल सराय जंक्शन का नाम बदलने का कारण- अब मुगलसराय जिले को पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर नाम से जाना जाएगा। 11 फरवरी सन 1968 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय का शव मुगलसराय स्टेशन के यार्ड में ही संदिग्ध परिस्तिथियों में मिला था तो तमाम जांचों के बाद आज भी पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मौत की असली वजह सामने नहीं आ पायी हैं। भाजपा सर्कार इन्हीं पंडित दीन दयाल को उपाध्याय को श्रद्धांजलि देने के मक़सद से इस जगह का नाम मुगलसराय से बदलर उनके नाम (दीन दयाल उपाध्याय नगर) पर रखना चाहती है।

0 Comments sort by oldest

Leave a Comment